
यूँ तो विश्व की हर ख़ुशी मेरे पास है
किन्तु फिर भी आज ये मन कुछ उदास है
लगता है जाग उठी फिर तुम्हे पाने की वो आस है
शायद इसलिए आज फिर ये मन उदास है!
आज भी याद है वो पल जब तुम्हे खोया था
दिल मेरा किस तरह से चीख चीख के रोया था
तुम वो सपना हो जो मैने बचपन से संजोया था
कैसे भूलूं वो दिन जब तुम्हे पाकर मैने खोया था!
एक अल्प सी मुलाकात थी जब तुम्हे जाना था
प्रेम मेरा निश्चल था, ये तुमने भी माना था
फिर उसके बाद हमे अलग अलग राह अपनाना था
बताओ इतना आसान कैसे ये कह पाना था?
क्या तुम्हे लगे मेरे प्यार के वचन झूठे
या किसी और कारण से तुम मुझसे रूठे
तुमसे दूरी का दुःख हर ख़ुशी मेरी लूटे
क्यूँ मेरे प्यार के सपने सारे टूटे?!
क्या मुझसे कोई भूल हुई जो तुम दूर चले गए?
या किसी विवशता में तुम कठोर बन चले गए?
इतना तो बता दो की क्या प्रेम मेरा साथ ले गए
या उसको भी तुम रास्ते में कहीं छोड़ कर चले गए?
सुना है कई बार मैने की साच को कोई आंच नहीं
जिसे तुम तोड़ गए वो ह्रदय था मेरा, कोई कांच नहीं!
सच्चा है प्रेम मेरा, इसे झुठला सकती कोई जांच नहीं
एक ही है प्रीतम मेरा, द्रौपदी की तरह कोई पांच नहीं!!
लौट आओगे फिर से तुम, आज भी ये आस है
आज भी तुम्हारे प्रेम को पाने की वो प्यास है
टूटा हुआ ही सही, 'मीरा' का ह्रदय तुम्हारे पास है
मेरे जीवन की साँसे, तुम्हारे लौट आने की आस हैं!!
[My first composition in Hindi :) ]